मानव व्यवहार बहुत ही जटिल होता है और यह किस कारण से होता है इसके लिए काफी शोध हो चुका है और निरंतर चल रहा है किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके जीवन में सफलता या असफलता को भी निर्धरित करता है मगर आप किसी व्यक्ति की भाव /क्रिया कलापो से उसके मन में चल रहे विचारो का अंदाजा लगा सकते है साथ ही आप अपने व्यवहार में कुछ तबदीली लाकर अपने जीवन को और ज्यादा सुगम बना सकते है
मानव व्यवहार उसके परिवार, समाज और रिश्तों से बनता है। परिवार, समाज और रिश्तों में ही मनुष्य पलता बढ़ता है, इसलिए इन्हीं लोगों के अनुसार अपना व्यवहार बना लेता है।उस समय जब मनुष्य में सभ्यता का विकास नहीं हुआ था, वो हमेंशा पत्ते पहनकर रहता था, तब भी उनमें मानवीय व्यवहार विद्यमान था।मनुष्य अकेले न रहकर,तब भी साथ में ही रहते थे शिकार करने के बाद मिल-बांटकर ही खाते थे, लेकिन उनमें विरोध भी होता होगा। अर्थात मानव व्यवहार प्राकृतिक है।
आज के समय में किसके साथ किस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए, यह भी बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज अगर एक ही प्रकार का व्यवहार सभी लोगों के लिए किया जाए तो उसका अर्थ अलग-अलग लोग अलग-अलग प्रकार से निकाल सकते हैं। वैसे सामान्य तौर पर व्यवहार दो प्रकार के होते हैं। एक, बचपन से जो माता-पिता या समाज के बताए गए विचार और व्यवहार को अपनाकर इस व्यवहार को लागू करना, यह एक प्रकार का जन्मजात व्यवहार होता है। दूसरा, वैसा व्यवहार जो समाज, अलग-अलग समय, स्थिति, व्यक्ति और व्यवस्था के आधार पर सीखने को मिलता है। परिस्थिति के अनुसार किए गए व्यवहार को सीखकर दूसरों के साथ वही व्यवहार करना जैसा को तैसा दूसरा व्यवहार होता है।
वैसे सामान्य तौर पर मुख्य रूप से और भी तीन प्रकार के व्यवहार की चर्चा समाज में होती है।
1=दृढ़ व्यवहार (Assertive Behaviour) असर्टिव बिहेवियर
इसे सबसे ज्यादा आदर्श व्यवहार भी माना जाता है, क्योंकि इसमें एक व्यक्ति दूसरे का सम्मान करते हुए अपनी बातों को भी उसके सामने रख देता है तथा दूसरे व्यक्ति को किसी भी प्रकार की ठेस न पहुँचे, उसका भी सम्मान रखा जाता है। लेकिन इसमें बात पूरी तरीके से सामने वाले व्यक्ति के सामने रखी जाती है। एक प्रकार से यह एक सामान्य व्यवहार होता है, जिसमें न अपनी बात कहने में झिझक होती है और न सामने वाले से कोई भय होता है कि हम अगर यह बात कहते हैं तो उसको बुरा लग सकता है या फिर वह व्यक्ति भड़क सकता है। इसकी भी इसमें चिंता नहीं होती है। यही व्यवहार आज समाज में अपनाने की भी जरूरत है, क्योंकि कभी-कभी कुछ बातों को अगर जानबूझकर नहीं कहा जाता है तो सामने वाले व्यक्ति को ऐसा लगता है कि वह व्यक्ति या तो मूर्ख है या फिर उसे चीजों के बारे में जानकारी नहीं है या फिर वह किसी अन्य कारण से अपनी बातों को रख नहीं सकता है। इसीलिए मानव जीवन में दृढ़ व्यवहार को सबसे सर्वोपरि माना गया है।
2=आक्रामक व्यवहार(Aggressive Behaviour)एग्रेसिव बिहेवियर
इसमें व्यक्ति दूसरे की बात नहीं सुनता है, बल्कि जो वह कहना चाहता है, करना चाहता है या दूसरे से भी करवाना चाहता है, वही केवल अपनी बात रखता है। किसी दूसरे की बात भी सुनेगा ही नहीं। न उसको यह समझने की आवश्यकता होती है कि क्या गलत है, क्या सही है, क्या कहना चाहिए और क्या नहीं कहना चाहिए। इसकी सोच-विचार किए बिना ही केवल अपनी भावनाओं और अपनी बातों को दूसरों के सामने तथा समाज के सामने मनवाने की भावना रखने वाला व्यक्ति केवल अपना आक्रामक व्यवहार प्रकट करता है। उसे ही एग्रेसिव बिहेवियर भी कहा जाता है, जो कि सामाजिक तौर पर बिल्कुल सही नहीं है।
3=दब्बू व्यवहार(Passive Behaviour)पैसिव बिहेवियर
इसमें व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए कुछ कह नहीं पाता है, अपने विचार और अपनी भावनाओं को प्रकट नहीं कर पाता है और दूसरों की बात में केवल हाँ में हाँ मिलाता रहता है। हाँ में हाँ मिलाने वाले व्यक्ति को दब्बू व्यवहार वाले व्यक्ति भी कहा जाता है, जो केवल दूसरों के गलत विचार, व्यवहार और भावना को भी सही कहता है और हाँ में हाँ मिलाता है।
आज समाज की जो स्थिति है, उसके अनुसार हर व्यक्ति को सही और गलत पर विचार करते हुए अपनी भावनाओं, विचारों और अभिव्यक्ति को स्वतंत्र रूप से प्रकट करना चाहिए। चाहे इससे किसी को बुरा लगता हो या फिर उसे किसी रिश्ते के टूटने का भी डर हो, तब भी अगर बात सही है तो उसको बेझिझक रखना चाहिए। जिसके लिए सबसे ज्यादा दृढ़ व्यवहार को आदर्श व्यवहार के रूप में अपनाना चाहिए।
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